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गोंड gotra ✓ समुदाय-सत्यापित

गोंड जनजाति की पहचान प्रणाली: राज्य, उप-जनजाति, गोत्र, सरनेम और देव व्यवस्था

27 August 2026 · Tribal Hearts संपादकीय टीम

प्रसिद्ध गोंड चित्रकार दुर्गाबाई व्याम की गोंड शैली की पेंटिंग
चित्र: Durgabai Vyam — Wikimedia Commons · CC BY 4.0

परिचय

गोंड, जो स्वयं को कोइतूर (Koitur) कहते हैं, भारत की सबसे बड़ी अनुसूचित जनजातियों में से एक हैं। जनगणना 2011 के अनुसार गोंड समुदाय मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र (विदर्भ), तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड और उत्तर प्रदेश में निवास करता है। गोंडी भाषा द्रविड़ भाषा-परिवार से जुड़ी है।

बाहर के लोगों को — और कई बार स्वयं समुदाय की नई पीढ़ी को भी — यह स्पष्ट नहीं होता कि गोंड, राज गोंड, धुर्वे, सात देव जैसे शब्द एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं। यह लेख इसी पहचान-क्रम को व्यवस्थित रूप से समझाता है।

मध्य प्रदेश के उमरिया ज़िले के आदिवासी गाँव में महिलाएँ चित्र: Yann — Wikimedia Commons · CC BY-SA 4.0

पाँच-स्तरीय पहचान प्रणाली

स्तर श्रेणी उदाहरण अर्थ/भूमिका
1 जनजाति गोंड (कोइतूर) समग्र जातीय एवं सांस्कृतिक समुदाय
2 उप-जनजाति राज गोंड, माड़िया, मुरिया, धुर गोंड आदि क्षेत्र, इतिहास या पारम्परिक भूमिका पर आधारित बड़ा विभाजन; एक उप-जनजाति में सैकड़ों गोत्र होते हैं
3 गोत्र / कूर धुर्वे, उइके, मरकाम, नेताम… एक ही पूर्वज से चली पितृवंशीय कुल-रेखा (clan)
4 देव व्यवस्था (सगा) 7 देव, 6 देव, 5 देव, 4 देव समूह गोत्रों का आध्यात्मिक-सामाजिक समूह; विवाह-नियम इसी पर आधारित हैं
5 आधुनिक सरनेम धुर्वे, उइके, मरकाम… स्कूल, आधार, नौकरी जैसे दस्तावेज़ों में प्रयुक्त कानूनी पहचान — प्रायः गोत्र से ही लिया गया

स्तर 2: उप-जनजाति क्या है?

उप-जनजाति गोंड समाज का बड़ा क्षेत्रीय/सामाजिक विभाजन है — जैसे राज गोंड (ऐतिहासिक रूप से शासक/भूस्वामी वर्ग), माड़िया और मुरिया (बस्तर क्षेत्र)। ध्यान रखें: धुर्वे या उइके उप-जनजाति नहीं हैं — वे गोत्र हैं। एक उप-जनजाति के भीतर सैकड़ों गोत्र होते हैं।

स्तर 3: गोत्र (कूर) — कुल की पहचान

गोत्र, जिसे गोंडी में कूर कहा जाता है, एक ही पूर्वज से उतरी पितृवंशीय कुल-रेखा है। एक ही गोत्र के सभी लोग परस्पर भाई-बहन माने जाते हैं, इसलिए समान गोत्र में विवाह वर्जित है (बहिर्विवाह/exogamy)। यही नियम गोंड वैवाहिक व्यवस्था की नींव है।

रसेल व हीरालाल की 1916 की पुस्तक 'The Tribes and Castes of the Central Provinces of India' का ऐतिहासिक चित्र-फलक चित्र: Russell & Hira Lal (1916), Internet Archive — Wikimedia Commons · सार्वजनिक डोमेन। यही पुस्तक इस लेख के स्रोतों में सम्मिलित है।

स्तर 4: देव व्यवस्था — गोत्रों के आध्यात्मिक समूह

प्रत्येक गोत्र किसी देव-समूह (सगा/phratry) से जुड़ा है — अर्थात वह कितने पैतृक देवों की पूजा करता है। सामान्यतः प्रचलित वर्गीकरण इस प्रकार बताया जाता है:

देव समूह प्रचलित गोत्र (उदाहरण)
7 देव (सात देव) धुर्वे, मरावी, मसराम, तराम, पंद्रो
6 देव (छह देव) उइके, टेकाम, मरकाम, कोर्राम, सलामे, कुडोपे
5 देव (पाँच देव) पोर्तेती, पड़ाम
4 देव (चार देव) नेताम, करियाम

पक्षी की आकृति वाली पारम्परिक गोंड चित्रकला चित्र: Bhaiyaji Smile 123 — Wikimedia Commons · CC BY-SA 4.0

महत्वपूर्ण: देव-गणना और गोत्र-सूची क्षेत्र, उप-जनजाति और गाँव के अनुसार भिन्न हो सकती है। ऊपर की तालिका मध्य भारत में व्यापक रूप से प्रचलित परम्परा पर आधारित है — अपने कुल की सटीक गणना के लिए अपने गाँव के बुज़ुर्गों/भूमका से पुष्टि अवश्य करें। जहाँ मतभेद हो, वहाँ सामुदायिक सत्यापन आवश्यक है।

स्तर 5: सरनेम — गोत्र का आधुनिक रूप

आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था (स्कूल प्रवेश, आधार कार्ड, सरकारी दस्तावेज़, नौकरी) में परिवार-नाम आवश्यक हुआ, तो गोंड परिवारों ने स्वाभाविक रूप से अपने गोत्र को ही सरनेम के रूप में अपना लिया। इसीलिए आज "धुर्वे" या "उइके" एक साथ दो चीज़ें हैं — पारम्परिक रूप से गोत्र, और कानूनी रूप से सरनेम।

उदाहरण: "धुर्वे" को समझें

  • क्या धुर्वे उप-जनजाति है? नहीं।
  • क्या धुर्वे गोत्र (कूर) है? हाँ — पारम्परिक रूप से।
  • क्या धुर्वे सरनेम है? हाँ — आधुनिक दस्तावेज़ों में।
  • देव-समूह? प्रचलित परम्परा में 7 देव (क्षेत्रीय पुष्टि करें)।

सारांश चेकलिस्ट

  • गोंड = जनजाति; राज गोंड/माड़िया/मुरिया = उप-जनजाति।
  • धुर्वे, उइके, मरकाम, नेताम… = गोत्र, जो आज सरनेम भी हैं।
  • हर गोत्र किसी देव-समूह (4/5/6/7 देव) से जुड़ा है।
  • समान गोत्र — और समान देव-समूह — में विवाह वर्जित है (विस्तार से अगले लेख में)।

अगला लेख पढ़ें: गोंड देव व्यवस्था और विवाह नियम — कौन किससे विवाह कर सकता है?

स्रोत एवं संदर्भ
  1. गोंड समुदाय पारम्परिक ज्ञान — देव-गणना एवं विवाह-नियम (संपादकीय सामुदायिक योगदान), Tribal Hearts संपादकीय (2026)
  2. People of India: National Series Vol. III — The Scheduled Tribes — K.S. Singh · Anthropological Survey of India (1994)
  3. The Tribes and Castes of the Central Provinces of India — R.V. Russell & Hira Lal, Macmillan (London) (1916)
  4. Census of India 2011 — Scheduled Tribes data — Registrar General, India · censusindia.gov.in, Registrar General, India · censusindia.gov.in (2011)
  5. The Gonds of Andhra Pradesh: Tradition and Change in an Indian Tribe — Christoph von Fürer-Haimendorf, Vikas Publishing (1979)
नोट: जनजातीय प्रथाएँ गाँव, क्षेत्र और कुल के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। यह लेख उपलब्ध स्रोतों पर आधारित सामान्य जानकारी है, विधिक या धार्मिक सलाह नहीं। कोई त्रुटि दिखे या आप अपने समुदाय की ओर से सुधार भेजना चाहें तो हमें लिखें — हम सुधार का स्वागत करते हैं।

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