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गोंड सगा व्यवस्था: नलवेन, सैवेन, सरवेन, येरवेन — चारों देव-समूहों की पूरी प्रणाली
27 August 2026 · Tribal Hearts संपादकीय टीम
सगा क्या है?
गोंड (कोइतूर) समाज केवल गोत्रों में ही नहीं बँटा — गोत्र (गोंडी में परी/कूर) स्वयं बड़े आध्यात्मिक समूहों में संगठित हैं, जिन्हें सगा (मानवशास्त्र में phratry) कहा जाता है। प्रत्येक सगा की पहचान इस बात से है कि उसके गोत्र कितने पैतृक देवों (पेन) की पूजा करते हैं। मानवशास्त्री फ्यूरर-हैमेनडॉर्फ़ के अध्ययनों पर आधारित विवरण स्पष्ट कहते हैं: गोंड समाज चार बहिर्विवाही, पितृवंशीय सगा-समूहों में विभाजित है, और प्रत्येक सगा अपनी उत्पत्ति देवताओं के एक समूह से मानता है।
उत्पत्ति-कथा: लिंगो और गुफा से निकले देव
गोंड परम्परा में कहा जाता है कि आदि-देव एक गुफा में बंद थे, जिन्हें महानायक पहांदी कुपार लिंगो (लिंगाल) ने मुक्त कराया। गुफा से देव चार समूहों में निकले — और इन्हीं चार देव-समूहों से चार सगा बने। हर गोंड गोत्र इन्हीं में से किसी एक समूह का वंशज है। सबके ऊपर हैं बड़ा देव / पेरसा पेन — समस्त कुल-देवों और ग्राम-देवों के अधिपति।
चित्र: विवाह अनुष्ठान, गोंड जनजाति · Varaprasad Sidam — Wikimedia Commons · CC BY 4.0
चारों सगा के नाम — और वे नाम बने कैसे?
सगा-नाम सीधे गोंडी गिनती से बने हैं — गोंडी में नालुंग = चार, सिलुंग = पाँच, सारलुंग = छह, येरलुंग = सात। इसीलिए:
| देव संख्या | गोंडी अंक | सगा का नाम | प्रमुख गोत्र (उदाहरण) |
|---|---|---|---|
| 4 देव | नालुंग (nālung) | नलवेन सगा (Nalven) | नेताम, करियाम |
| 5 देव | सिलुंग (silung) | सैवेन/सियेन सगा (Saiven) | पोर्तेती, पड़ाम |
| 6 देव | सारलुंग (sārlung) | सरवेन सगा (Sarven) | उइके, टेकाम, मरकाम, कोर्राम, सलामे, कुडोपे |
| 7 देव | येरलुंग (yerlung) | येरवेन/येलवेन सगा (Yerwen/Yelven) | धुर्वे, मरावी, मसराम, तराम, पंद्रो |
कुछ अध्ययनों में एक और समूह का उल्लेख मिलता है — जुंगवेन सगा (बारह देव) — पर यह सभी क्षेत्रों की परम्परा में नहीं गिना जाता; अपने अंचल के बुज़ुर्गों से पुष्टि करें।
ध्यान दें: उच्चारण क्षेत्र-अनुसार बदलते हैं (येरवेन/येलवेन, सैवेन/सिवेन आदि) और गोत्र-सूचियाँ भी उप-जनजाति व अंचल के अनुसार भिन्न मिलती हैं। तालिका मध्य भारत में व्यापक प्रचलन पर आधारित है; जहाँ मतभेद हो, वहाँ सामुदायिक सत्यापन आवश्यक मानें।
येरवेन सगा — सात देवों के उपासक
सात देवों की पूजा करने वाले गोत्र येरवेन (येलवेन) सगा में आते हैं — धुर्वे, मरावी, मसराम, तराम, पंद्रो इस समूह के प्रसिद्ध गोत्र हैं। इस सगा के सभी गोत्र आपस में भाई-गोत्र हैं — एक ही सात पैतृक देवों की संतान — इसलिए इनके बीच विवाह वर्जित है। संस्कारों में सात की संख्या का विशेष स्थान क्षेत्रानुसार मिलता है।
सरवेन सगा — छह देवों के उपासक
छह देवों के उपासक गोत्र — उइके, टेकाम, मरकाम, कोर्राम, सलामे, कुडोपे — सरवेन सगा बनाते हैं। कई अंचलों की परम्परा में इस समूह का ऐतिहासिक गढ़ चंदागढ़ से जोड़ा जाता है और समारोहों में इनकी पहचान पीले ध्वज से होती है — ये विवरण सामुदायिक स्मृति पर आधारित हैं (सामुदायिक सत्यापन आवश्यक)।
चित्र: आदिवासी विवाह में वर-वधू · Ajaychouhan811 — Wikimedia Commons · CC BY-SA 4.0
सैवेन सगा — पाँच देवों के उपासक
पाँच देवों का समूह सैवेन (सियेन) सगा कहलाता है — पोर्तेती, पड़ाम जैसे गोत्र इसमें गिने जाते हैं। इस समूह की गोत्र-सूचियों पर क्षेत्रीय प्रलेखन अपेक्षाकृत कम है — सामुदायिक सत्यापन आवश्यक।
नलवेन सगा — चार देवों के उपासक
चार देवों का समूह नलवेन सगा है — नेताम, करियाम जैसे गोत्र इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं। (कुछ अंचलों में नेताम को भिन्न समूह में भी गिना गया है — जहाँ मतभेद हो, वहाँ अपने क्षेत्र की परम्परा ही मान्य है।)
सगा और विवाह — मूल सूत्र
एक ही सगा के भीतर विवाह वर्जित। भिन्न सगा में विवाह मान्य।
| वर (सगा) | वधू (सगा) | विवाह |
|---|---|---|
| धुर्वे (येरवेन · 7) | मरावी (येरवेन · 7) | ❌ वर्जित — एक ही सगा |
| उइके (सरवेन · 6) | कुडोपे (सरवेन · 6) | ❌ वर्जित — एक ही सगा |
| धुर्वे (येरवेन · 7) | उइके (सरवेन · 6) | ✅ मान्य |
| मरकाम (सरवेन · 6) | नेताम (नलवेन · 4) | ✅ मान्य |
| पंद्रो (येरवेन · 7) | पोर्तेती (सैवेन · 5) | ✅ मान्य |
चित्र: आदिवासी विवाह समारोह · Dreamangel7 — Wikimedia Commons · CC BY-SA 4.0
यह व्यवस्था समाज को क्या देती है?
- बहिर्विवाह (exogamy) — निकट रक्त-संबंधों में विवाह स्वतः रुक जाता है।
- सामाजिक गठबंधन — हर विवाह दो भिन्न सगा-समूहों (और प्रायः दो गाँवों) को जोड़ता है।
- साझा उत्तरदायित्व — हर सगा अपने पेनों का संरक्षक है; पर्वों पर सब मिलकर बड़ा देव (पेरसा पेन) के नीचे एक होते हैं।
- पहचान — सरनेम सुनते ही परम्परा-ज्ञाता बता सकते हैं कि रिश्ता सम्भव है या नहीं।
चित्र: आदिवासी विवाह · Rhitik1998 — Wikimedia Commons · CC BY-SA 4.0
आम प्रश्न
मेरा सरनेम किस सगा में है? ऊपर की तालिका देखें; न मिले तो अपने गाँव के बुज़ुर्गों/भूमका से अपने कुल की देव-संख्या पूछें — वही निर्णायक है।
क्या सगा कभी बदलता है? नहीं — सगा जन्म से, पिता की कुल-रेखा से मिलता है।
क्या सभी क्षेत्रों में एक जैसी सूची है? मूल नियम (समान सगा में विवाह वर्जित) सर्वत्र समान है; नामों-सूचियों में क्षेत्रीय भिन्नता मिलती है।
सारांश चेकलिस्ट
- गोंड समाज के चार सगा: नलवेन (4 देव) · सैवेन (5 देव) · सरवेन (6 देव) · येरवेन (7 देव); कुछ स्रोतों में जुंगवेन (12 देव) भी।
- नाम गोंडी अंकों से बने: नालुंग-सिलुंग-सारलुंग-येरलुंग।
- उत्पत्ति: लिंगो द्वारा गुफा से मुक्त देवों के चार समूह।
- एक ही सगा में विवाह वर्जित; भिन्न सगा में मान्य।
- सबके ऊपर बड़ा देव / पेरसा पेन; अंतिम पुष्टि अपने क्षेत्र के बुज़ुर्गों से।
सम्बंधित लेख: गोंड देव व्यवस्था और विवाह नियम · बहिर्विवाह (Exogamy) · अंतर्विवाह (Endogamy) · गोंड जनजाति की पहचान प्रणाली
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