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संथाल vivah

संथाल जनजाति के विवाह रीति‑रिवाज़

27 August 2026 · Tribal Hearts संपादकीय टीम

Where Earth Remembers Color
चित्र: Kingshukchakravarty — Wikimedia Commons · CC BY 4.0

परिचय

संथाल (या सन्ताल) भारत‑के झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, असम और त्रिपुरा सहित कई राज्यों में बसे एक प्रमुख मुण्डा‑भाषी जनजातीय समूह हैं। उनका सामाजिक जीवन पारस्परिक संबंधों, विशेषकर पेरा, बाला और संगत जैसी पारिवारिक बंधनों के इर्द‑गिर्द घूमता है। ये संबंध न केवल सामाजिक एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि विवाह के नियम‑कानून को भी निर्धारित करते हैं।

सामाजिक संरचना और पारिवारिक संबंध

वर्ग पहचान भूमिका
जनजाति संथाल सामूहिक पहचान, भाषा, संस्कृति
उप‑जनजाति विभिन्न क्षेत्रीय समूह (जैसे बड़गांव, बड़हिया) स्थानीय सामाजिक नेटवर्क
बंधन पेरा वह समूह जिनमें भाई‑भाई का संबंध नहीं, परंतु निकटता से जुड़े होते हैं; अक्सर कारीगर जातियों (करमाकर, महाली, लोहार) को भी शामिल किया जाता है
सगाई‑रूप बाला दूल्हा‑दुल्हन के माता‑पिता के बीच का संबंध, जो दो परिवारों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है
सगाई‑रूप संगत दूल्हा‑दुल्हन के क्रॉस‑सिब्लिंग (भाई‑बहन के भाई‑बहन) के बीच का संबंध, जो विवाह में विशेष महत्व रखता है

पेरा शब्द उन लोगों के लिये प्रयोग होता है जिनके साथ भाई‑भाई का बंधन नहीं है, परंतु वे सामाजिक रूप से अतिथि‑सम्बन्धी होते हैं; इस समूह में करमाकर, महाली और लोहार जैसी जातियाँ भी सम्मिलित हैं। पेरा के लोग विवाह के लिये स्वीकार्य होते हैं और बड़े‑बड़े त्यौहारों में अतिथि के रूप में भाग ले सकते हैं। महिलाओं द्वारा पेरा के आगमन पर विशेष स्वागत‑रिवाज़ किए जाते हैं।

विवाह की तैयारी

  1. सगाई (बाला/संगत) की पुष्टि – दूल्हा‑दुल्हन के माता‑पिता आपस में मिलते हैं, बाला या संगत के आधार पर संबंध स्थापित किया जाता है।
  2. घर की सफ़ाई एवं सजावट – दुल्हन के घर में विशेष सफ़ाई की जाती है; घर के द्वार पर पान, धान और फूल सजाए जाते हैं।
  3. आमंत्रण एवं मेहमान‑सूची – पेरा और निकटवर्ती कबीले को आमंत्रित किया जाता है; मेहमानों को विशेष स्वागत‑भोजन दिया जाता है।
  4. संगीत व नृत्य – विवाह से पहले गाँव में ढोलक, बांसुरी और पंडोला (ड्रम) की ध्वनि गूँजती है; युवा पुरुष‑महिला नृत्य (जैसे जुड़ो) करते हैं।

मुख्य अनुष्ठान

  • बन्धन (जोर) – दूल्हा और दुल्हन के हाथों में धागा बाँधकर ‘जोर’ किया जाता है, जिससे उनका बंधन स्थायी माना जाता है।
  • संगत‑सत्र – यदि दूल्हा‑दुल्हन संगत के रूप में जुड़े हों, तो दोनों परिवारों के बड़े लोग मिलकर एक विशेष गीत गाते हैं, जो दो कबीलों के मिलन को दर्शाता है।
  • भोजन‑वितरण – अनाज, दाल, मांस (यदि समुदाय में प्रचलित हो) और पान के साथ सामुदायिक भोजन किया जाता है; सभी मेहमानों को समान रूप से परोसा जाता है।
  • पेरा‑स्वागत – पेरा के सदस्य को दुल्हन के परिवार की महिलाओं द्वारा ‘पेरा‑स्वागत’ रस्म में फूल, पान और मीठा दिया जाता है।
  • विवाह‑समाप्ति – दूल्हा‑दुल्हन को घर की ओर ले जाने के लिये ‘गृहप्रवेश’ किया जाता है; यहाँ पर घर के मुखिया द्वारा आशीर्वाद दिया जाता है।

सामाजिक महत्व

  • समुदायिक एकता – विवाह के माध्यम से विभिन्न पेरा समूहों के बीच सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं।
  • आर्थिक सहयोग – शादी में उपयोग होने वाले अनाज, कपड़े और आभूषण अक्सर पड़ोसियों के सहयोग से जुटाए जाते हैं, जिससे संसाधन‑साझाकरण को बढ़ावा मिलता है।
  • सांस्कृतिक निरंतरता – गीत, नृत्य और रस्में पीढ़ी‑दर‑पीढ़ी संरक्षित रहती हैं, जिससे संथाल की सांस्कृतिक पहचान बनी रहती है।

समकालीन परिवर्तन

  1. शिक्षा एवं शहरीकरण – युवा वर्ग के बढ़ते शैक्षिक स्तर और नौकरी‑पैत्रिक प्रवास के कारण पारंपरिक विवाह में छोटे‑छोटे बदलाव देखे जा रहे हैं; अक्सर दो‑दिन के बजाय एक‑दिन के समारोह होते हैं।
  2. धार्मिक प्रभाव – कुछ संथाल परिवार हिंदू या ईसाई धर्म अपनाते हुए वैवाहिक अनुष्ठानों में ‘सात फेरे’ या चर्च‑विवाह के तत्व जोड़ रहे हैं।
  3. कानूनी व्यवस्था – भारत के विवाह अधिनियम (विशेष रूप से ‘समानता अधिनियम’) के तहत कई संथाल युवा अब सिविल रजिस्ट्रेशन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे पारंपरिक पेरा‑बन्धन की औपचारिकता कम हो रही है।
  4. मीडिया एवं पर्यटन – बाहरी शोधकर्ताओं और पर्यटन उद्योग के बढ़ते रुचि से संथाल के विवाह समारोह अब कभी‑कभी सार्वजनिक प्रदर्शन बनते हैं, जिससे आर्थिक लाभ के साथ-साथ सांस्कृतिक संवेदनशीलता के प्रश्न भी उत्पन्न होते हैं।

सारांश चेकलिस्ट

  • क्या यह उप‑जनजाति है? → हाँ, विभिन्न क्षेत्रीय समूहों में विभाजन होता है।
  • क्या यह बाला/संगत संबंध है? → हाँ, दोनों ही विवाह के मूल आधार हैं।
  • क्या यह सरनेम है? → संथाल में पारम्परिक सरनेम नहीं, बल्कि कबीला‑नाम (जैसे ‘डोहिया’, ‘बड़हिया’) अधिक प्रचलित हैं।
  • क्या यह देव‑संख्या है? → संथाल में देव‑संख्या के बजाय पेरा‑प्रणाली प्रमुख है; इस विषय पर सामुदायिक सत्यापन आवश्यक।

उपरोक्त जानकारी उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है; जहाँ विशिष्ट विवरण नहीं मिले, वहाँ ‘सामुदायिक सत्यापन आवश्यक’ संकेत दिया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ
  1. Santal people, en.wikipedia.org
  2. Santal people, en.wikipedia.org
  3. Santal people, en.wikipedia.org
  4. Santal people, en.wikipedia.org
  5. Tribal religions in India - Wikipedia, en.wikipedia.org
  6. Hindu wedding - Wikipedia, en.wikipedia.org
  7. People of India: National Series Vol. III — The Scheduled Tribes — K.S. Singh · Anthropological Survey of India (1994) · Chapter 5
नोट: जनजातीय प्रथाएँ गाँव, क्षेत्र और कुल के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। यह लेख उपलब्ध स्रोतों पर आधारित सामान्य जानकारी है, विधिक या धार्मिक सलाह नहीं। कोई त्रुटि दिखे या आप अपने समुदाय की ओर से सुधार भेजना चाहें तो हमें लिखें — हम सुधार का स्वागत करते हैं।

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