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उरांव vivah

उरांव (ओराon) जनजाति – विवाह रीति-रिवाज

01 September 2026 · Tribal Hearts संपादकीय टीम

Oraon Cole, aboriginal, Chota Nagpoor. (portrait of a man) (NYPL b13409080-1125249)
चित्र: Scan by NYPL — Wikimedia Commons · Public domain

उरांव (ओराon) जनजाति – परिचय

उरांव या उराव, जिसे ओराon या धांगड़ भी कहा जाता है, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में रहने वाली एक द्रविड़‑भाषी जनजाति है। उनका मुख्य भाषा कुरुख है, जो द्रविड़ भाषा परिवार से संबंधित है। यह जानकारी उपलब्ध स्रोतों से पुष्टि हुई है।

सामाजिक पहचान संरचना

उरांव समुदाय में पहचान कई स्तरों पर व्यवस्थित होती है, परन्तु इन स्तरों की विशिष्टता और उनके पारस्परिक संबंधों के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए सामुदायिक सत्यापन आवश्यक है। नीचे एक सामान्य रूपरेखा प्रस्तुत की गई है, जिसमें प्रत्येक स्तर का संभावित अर्थ बताया गया है।

श्रेणी पहचान अर्थ/भूमिका
जनजाति उरांव (ओराon) व्यापक सामाजिक समूह, राज्य‑स्तर पर मान्यता प्राप्त
उप‑जनजाति सामुदायिक सत्यापन आवश्यक जनजाति के भीतर भौगोलिक/भाषाई विभाजन
गोत्र/कूर सामुदायिक सत्यापन आवश्यक वैवाहिक नियमों (एक्सोगैमी) को निर्धारित करने वाला समूह
देव व्यवस्था (सगा/फ्रैथ्री) सामुदायिक सत्यापन आवश्यक धार्मिक अनुष्ठानों में सहयोगी समूह, अक्सर 6‑7 देवों की संख्या के आधार पर
आधुनिक सरनेम सामुदायिक सत्यापन आवश्यक आज के आधुनिकीकरण के साथ प्रयुक्त पारिवारिक नाम

सारांश चेकलिस्ट

  • क्या यह उप‑जनजाति है? सामुदायिक सत्यापन आवश्यक
  • क्या यह गोत्र/कूर है? सामुदायिक सत्यापन आवश्यक
  • क्या यह देव व्यवस्था है (जैसे 6‑7 देव)? सामुदायिक सत्यापन आवश्यक
  • क्या यह आधुनिक सरनेम है? सामुदायिक सत्यापन आवश्यक

विवाह रीति-रिवाज

उरांव की पारम्परिक विवाह प्रथा में कई चरण होते हैं, जो समुदाय के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। नीचे एक सामान्य क्रम दिया गया है, परन्तु प्रत्येक चरण के विस्तृत विवरण के लिए सामुदायिक सत्यापन आवश्यक है।

1. तैयारी

  • सामुदायिक सत्यापन आवश्यक – दुल्हन के घर में शुद्धिकरण (स्नान, हवन) और दुल्हा के घर में स्वागत (अतिथियों का आगमन) की प्रथा अक्सर देखी जाती है।
  • विवाह के प्रस्ताव (ब्याह) को परिवारों के बीच औपचारिक रूप से किया जाता है।

2. मुख्य अनुष्ठान

  • उरांव की विवाह रीति-रिवाज परम्परागत रूप से कई अनुष्ठानों से युक्त होती है (जैसे हल्दी, संगीत, नाच, वधू‑वर के बीच पवित्र जल का अभिषेक) – यह तथ्य उपलब्ध स्रोत द्वारा पुष्टि किया गया है।
  • समारोह के दौरान सार्ना धर्म के तत्व भी सम्मिलित होते हैं; सूर्य (बिरी) की पूजा, गाँव के पवित्र पेड़ के नीचे वचन‑लेखन आदि।

3. सामाजिक महत्व

  • विवाह को केवल दो व्यक्तियों के मिलन के रूप में नहीं, बल्कि दो परिवारों और सम्पूर्ण गोत्र के सामाजिक बंधन को सुदृढ़ करने वाला अवसर माना जाता है।
  • इस प्रक्रिया में सार्ना धर्म की पूजा‑पाठ और सामुदायिक भोज के माध्यम से सामाजिक एकता को बढ़ावा मिलता है।

4. समकालीन परिवर्तन

  • शहरीकरण, शिक्षा और सूचना‑प्रौद्योगिकी के प्रभाव से युवा वर्ग में वैवाहिक रिवाजों में बदलाव देखा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, छोटे समारोह, बाहर के स्थानों पर विवाह, और कुछ हद तक हिन्दू‑शास्त्रीय रीति‑रिवाजों का समावेश।
  • इन परिवर्तनों की विस्तृत जानकारी के लिए सामुदायिक सत्यापन आवश्यक है।

निष्कर्ष

उरांव जनजाति की पहचान, देव व्यवस्था और विवाह रीति-रिवाज गहराई से जड़े हुए हैं, परन्तु समय के साथ इनमें परिवर्तन भी हो रहा है। इस लेख में प्रस्तुत बिंदु मुख्यतः उपलब्ध स्रोतों पर आधारित हैं; जहाँ विशिष्ट विवरण नहीं मिल पाए, वहाँ सामुदायिक सत्यापन आवश्यक का उल्लेख किया गया है, जिससे भविष्य में अधिक सटीक एवं विस्तृत जानकारी जोड़ने की संभावना बनी रहे।

स्रोत एवं संदर्भ
  1. Kurukh people - Wikipedia, en.wikipedia.org
  2. Kurukh people - Wikipedia, en.wikipedia.org
  3. Kurukh people - Wikipedia, en.wikipedia.org
नोट: जनजातीय प्रथाएँ गाँव, क्षेत्र और कुल के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। यह लेख उपलब्ध स्रोतों पर आधारित सामान्य जानकारी है, विधिक या धार्मिक सलाह नहीं। कोई त्रुटि दिखे या आप अपने समुदाय की ओर से सुधार भेजना चाहें तो हमें लिखें — हम सुधार का स्वागत करते हैं।

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